Dakshin Asia mein Bharat ki pramukh kootneetik ranneetiyan kya hain
दक्षिण एशिया में भारत की प्रमुख कूटनीतिक रणनीतियाँ ?
परिचय
दक्षिण एशिया भारत की विदेश नीति में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस क्षेत्र में पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान जैसे देश शामिल हैं। भारत, क्षेत्र का सबसे बड़ा और प्रभावशाली देश होने के कारण, क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने, सहयोग बढ़ाने और शांति स्थापित करने की जिम्मेदारी निभाता है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारत विभिन्न कूटनीतिक रणनीतियाँ अपनाता है।
1. पड़ोसी पहले नीति (Neighbourhood First Policy)
यह नीति भारत की प्राथमिक विदेश नीति रणनीति है, जिसमें पड़ोसी देशों से बेहतर संबंध बनाना मुख्य उद्देश्य है।
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उच्च स्तरीय यात्राएँ: प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति द्वारा पड़ोसी देशों की नियमित यात्राएँ।
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विकास सहायता: नेपाल, भूटान, बांग्लादेश आदि को बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों में सहायता।
इस नीति से भारत अपनी छवि मजबूत करता है और क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करता है।
2. क्षेत्रीय सहयोग: सार्क और बिम्सटेक
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सार्क (SAARC) भारत के लिए एक बहुपक्षीय मंच है, जिससे वह क्षेत्रीय सहयोग, आर्थिक विकास और शांति को बढ़ावा देता है।
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बिम्सटेक (BIMSTEC) दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को जोड़ता है। भारत इसे सार्क का प्रभावी विकल्प मानता है।
इन संगठनों के माध्यम से भारत व्यापार, संपर्क और ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देता है।
3. आर्थिक कूटनीति
भारत अपने पड़ोसियों के साथ व्यापार और निवेश को बढ़ाकर कूटनीतिक संबंध मजबूत करता है।
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मुक्त व्यापार समझौते: श्रीलंका और नेपाल के साथ समझौते।
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बुनियादी ढांचा निर्माण: सड़क, रेल, बिजली परियोजनाएँ आदि में सहयोग।
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ऊर्जा सहयोग: नेपाल और भूटान के साथ जलविद्युत परियोजनाएँ।
आर्थिक कूटनीति से क्षेत्रीय एकता को बढ़ावा मिलता है।
4. सांस्कृतिक और सॉफ्ट पावर कूटनीति
भारत अपने सांस्कृतिक संबंधों और विरासत का उपयोग पड़ोसी देशों के साथ भावनात्मक जुड़ाव के लिए करता है।
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सांस्कृतिक आदान-प्रदान: उत्सव, भाषा प्रशिक्षण, छात्रवृत्तियाँ।
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धार्मिक पर्यटन: श्रीलंका, भूटान और पाकिस्तान से तीर्थयात्रा को बढ़ावा।
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शिक्षा और मीडिया: भारतीय फिल्में और विश्वविद्यालयों में अध्ययन अवसर।
इस रणनीति से भारत की लोकप्रियता और सॉफ्ट पावर बढ़ती है।
5. सुरक्षा और रक्षा सहयोग
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सीमा प्रबंधन: नेपाल, भूटान के साथ खुले और पाकिस्तान, बांग्लादेश के साथ नियंत्रित सीमाएँ।
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संयुक्त सैन्य अभ्यास: नेपाल (सूर्य किरण), बांग्लादेश (सम्प्रति), मालदीव (एकुवेरिन)।
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समुद्री सुरक्षा: मालदीव और श्रीलंका को समुद्री निगरानी में मदद।
यह रणनीति भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता बनाती है।
6. चीन के प्रभाव को संतुलित करना
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विकल्पीय परियोजनाएँ: भारत पारदर्शी और कर्ज-मुक्त विकास परियोजनाएँ प्रदान करता है।
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संबंधों को गहरा करना: बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल आदि के साथ अधिक सहयोग।
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रणनीतिक साझेदारी: क्वाड और इंडो-पैसिफिक रणनीति के तहत संतुलन।
भारत चीन के प्रभाव को सीमित करने के लिए सक्रिय कूटनीति अपनाता है।
7. आपदा और मानवीय सहायता कूटनीति
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कोविड वैक्सीन मैत्री: नेपाल, भूटान, बांग्लादेश आदि को टीके भेजे गए।
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नेपाल भूकंप (2015): तुरंत सहायता।
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बाढ़ और चक्रवात राहत: नियमित मानवीय सहायता।
यह रणनीति भारत को एक जिम्मेदार नेता के रूप में प्रस्तुत करती है।
8. द्विपक्षीयता और बहुपक्षीयता में संतुलन
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पाकिस्तान जैसे देशों से भारत द्विपक्षीय संवाद को प्राथमिकता देता है।
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नेपाल, बांग्लादेश आदि के साथ BBIN और BIMSTEC जैसे मंचों पर बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देता है।
यह संतुलन भारत की कूटनीति को लचीलापन और प्रभावशीलता प्रदान करता है।
9. राजनीतिक स्थिरता और लोकतंत्र का समर्थन
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भारत पड़ोसी देशों में लोकतंत्र का समर्थन करता है।
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नेपाल और मालदीव जैसे देशों में शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण को बढ़ावा देता है।
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म्यांमार जैसे देशों में सैन्य तख्तापलट का सावधानी से मूल्यांकन करता है।
भारत लोकतांत्रिक मूल्यों को क्षेत्र में फैलाने की कोशिश करता है।
निष्कर्ष
दक्षिण एशिया में भारत की कूटनीतिक रणनीतियाँ बहुआयामी और व्यावहारिक हैं। भारत विकास, सुरक्षा, संस्कृति और सहयोग के माध्यम से अपने पड़ोसियों के साथ बेहतर संबंध बनाकर न केवल क्षेत्रीय स्थिरता लाता है, बल्कि वैश्विक मंचों पर अपनी स्थिति को भी मजबूत करता है। भविष्य में भी भारत की कूटनीति का यह क्षेत्र केंद्रीय हिस्सा बना रहेगा।
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